Thursday, October 30, 2008

Selected video clips Saibaba tv seraial September 21 2008




Above are the selected video clips from Saibaba Tv serial aired on 21st September 2008.

Some of the speech ( in Hindi and translated in English) and songs in Hindi and English script is given below .

जिस जिस ने तेरा नाम लिया तू हो गया उनके साथ. श्री साइबाबा ने शिर्डी में अवत्रिन हो कर शिर्डी को पवित्र बनाया. साई बाबा १६ वर्ष की उम्र मैं नीम के पेड़ के निचे भक्तो के उद्धार के लिए प्रगत हुई. फिर अचानक अद्रश्य हो गए, अपनी तपस्या, योगसाधना पूरी करके चाँद पाटिल की बारात के साथ शिर्डी लोटे.

तब खंडोबा मंदिर के पुजारी महलसपति ने उनको देखते ही उत्साहित हो कर पुकारा, आओ साई, तब से उनका नामकरण हुआ साइबाबा. कोई साइबाबा कहने लगे तो कोई सैनाथ. शिर्डी के लोगो को साक्षात्कार हुआ के साइबाबा भगवान् है.

Rough translation of the above. Whoever remembered your name you are with the one. Sai Baba appeared in the land of Shirdi and made it holy and sacred, throbbing with divine love. Sai Baba was first seen in Shirdi village when he was 16 years of age. Saibaba never told about his birthdate or location of birth. Hence there are many speculations about the same, but no authoritive information about the same.

He leftg Shirdi and returned with a Muslim devotee Chand Patil. One can read the details in Shri Sai SatCharitra chapter 5. A local devotee of Shri Khandoba named Mahalsapati welcommed Him as "Aaoo Sai" meaning welcome Sai. Since he is known as Saibaba a divine magnet for so many devotees and taking care of them according to their needs.

Song or Arati from the television serial Hindi and English Script.

* Jyot jalaao, milkar gaaoo, (2)
Sai ki Mahimaa (2)

repeat *

Om Sai Om Sai Alakh Niranjan,
mangalkarak, bhaydukh bhanjan,
Om Sai Om Sai Mahasukhdayak,
Bal budhi or vidhya pradayak,
Shraddha jagao, milkar gaoo (2nd time chorus)
Sai ki Mahimaa, Sai ki mahimaa
Jyot jalao, milkar gaoo (chorus)

Sainath Maharaj Ki Jai (chorus 3 times)

Song or Arati in Hindi script

* ज्योत जलाओ, मिलकर गाओं, (२)
साई की महिमा (२)

वापश *

ॐ साई ॐ साई अलख निरंजन,
मंगलकारक, भय्दुख भंजन,
ॐ साई ॐ साई महासुख्दायक,
बल बुधी और विद्या प्रदायक,
श्रद्धा जगाओ, मिलकर गओं (दूसरी बार कोरस )
साई की महिमा, साई की महिमा
ज्योत जलाओ, मिलकर गओ (कोरस)

साईनाथ महाराज की जय (कोरस ३ बार )

Speech

संतो ने कहा जहा राम है वह काम नही , जहा काम है वह राम नही,
काम का मतलब है आशक्ति, जहा लोभ है, आशक्ति है, वहां न शान्ति है ना संतोष है ना समाधान है ।

ऐसा क्यों होता है?
हम अपने चंचल मन के आधीन क्यों हो जाते है?
क्यों नाचते है चंचल मन के इशारो पर?
चंचल मन को अपने इशारो पर क्यों नही नचाते ?
क्योकि हमारा अपने मन पर अंकुश नही। हम अपने मन को काबू में नही रख पाते। अपने मान को काबू मैं रखने के लिए हमे मार्गदर्शन की जरूरत होती है। और जो मार्गदर्शन करता है उसे हम गुरु कहेते है।

गुरु। गुरु हमारा तारनहार है। गुरु हमारा उद्धार करता है। गुरु हमारा मोक्ष दाता हँ। गुरु ही हमारे मन से आशक्ति को हटाकर हामारै मन मैं विवेक और वैराग्य को जनाम देता है । गुरु की कृपा से ही हमारा मन अहंकार्शुन्य होकर उस मालिक की भक्ति मैं लग जाता है । और फिर वो अपनी चंचलता भुलाकर हमेशा मालिक को याद करता रहेता है। फिर तो हमारा अपने शरीर पर भी ध्यान नही रहेता। हमारा शरीर भी हमारे किए भक्ति का एक साधन बाण जाता है। शरीर में रहेने वाली अशरीरी आत्मा का परमात्मा के साथ रिश्ता बन जा है। अपने आप को भी भूल जाने की स्थिति पैदा होती है. तब इंसान आपनी उनती के रस्ते पर होता है. उसे मालिक का परम धाम दिखाई देने लगता है. परन्तु उसे मालिक के परम धाम तक लेकर जाने वाला होता है, गुरु!

Guru insaan ki maa hota hai. insaan ka pita, mitra, bhai, behen aur, insaan ka malik bhi hota hai. Guru nahi to insaan magroor hai, Guru hai to insaan vinarma hai. Guru ke aashirwad se hi Malik ki kripa Sambav hoti hai. isliye kehete hai ki " Gurur Bhrahma, Gurur Vishnu, Gurur devo Maheshwarai. Guru Sakhshat parabhrahma, tatshmai shree guruve namaha. Sabka Malik ek.

Next is a story of Shree Swami Samarth of Akkalkot. Very similar to Saibaba's calling His devotees in distress and helping them.

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